गरीब और अमीर में अंतर अमीर कैसे बने?

गरीब और अमीर में अंतर अमीर कैसे बने?


अगर आप काम करना बंद कर दें। यह कल्पना कीजिए, कितने देर तक आप अपने जमाए paiso पर जी सकेंगे? जो मैंने अभी आपसे पूछा, वह संपत्ति की परिभाषा है। यह जो व्यक्ति है, इनका नाम robot किओसाकी है।

एक अमेरिकी Investors, business, लेखक, मोटिवेशनल वक्ता और वित्तीय कॉमेंटेटर जो हाल ही में विश्व प्रख्यात हुए हैं, जिनके पास 80 मिलीयन डॉलर कि संपत्ति है। कुछ दिलचस्प जानना चाहेंगे? उनकी पृष्ठभूमि कोई amir घराने की नहीं है। बल्कि, उनका परिवार दूसरों की तरह ही मध्यम garib वर्ग से था और उनके पास वित्तीय समझ नहीं थी और हमेशा ही आर्थिक संकटों से जूझते रहते।


  • Rich Dad, Poor Dad


फिर रॉबर्ट आज इतने amir कैसे हो गए? तो चलिए एक नजर डालते हैं उनके किताब "रिच डैड, पुअर डैड" ("Rich Dad, Poor Dad") पर। Robot किओसाकी का जन्म हाईलो, हवाई में अप्रैल 1947 को हुआ था। 1957 में जब वह 9 वर्ष के थे तब वह उसी सरकारी स्कूल में जाते थे, जहाँ amir लोगों के बच्चे भी जाते थे क्योंकि उनके शहर में बहुत सारे डॉक्टर, व्यवसाय के मालिक और बैंक कर्मचारी रहते थे।

रॉबर्ट ने देखा कि amir बच्चे, उनसे दूरी बनाकर रहते थे, क्योंकि वह नए खिलौने नहीं खरीद पाते थे। तो एक दिन रॉबर्ट ने अपने father से पूछा जिन्होंने पीएचडी की थी और कई सारे विश्वविद्यालयों से सर्वश्रेष्ठ डिग्री हासिल की थी। "पिताजी, क्या आप मुझे बता सकते हैं कि अमीर कैसे बनते हैं" दुर्भाग्य से उनके पिताजी को इसका उत्तर नहीं मालूम था। क्योंकि वह खुद amir नहीं थे।


  • Garibi dur kaise ho


तो उन्होंने कहा "अपने दिमाग का इस्तेमाल करो बेटे" "स्कूल में पढ़ाई करो, अच्छे number प्राप्त करो जिससे कि तुम्हें एक सुरक्षित naukari मिल सके" उन्होंने अपने पिता जी को, "Poor Dad" कहकर सम्बोधित किया है। हालांकि इस वक्त वह काफी paisa कमा रहे थे। मगर आखिर में, इस व्यक्ति का आर्थिक life ढलान की ओर चले जाता है। अभी, नन्हे रॉबर्ट, के पास एक दोस्त था इसका नाम था माइक।

यहा माइक के पिताजी को वह, "Rich Dad" कहकर सम्बोधित करते हैं। वास्तव में कैसे amir बनना है, इस बारे में, रोबोट और उनके बेटे माइक को वह प्रशिक्षित करते हैं समय के इस मोड में "amir Dad" इतने अमीर नहीं थे मगर कुछ ही समय बाद, वह हवाई में सबसे amir व्यक्तियों में से एक बन गए। तो रिच डैड ने रॉबर्ट को क्या सिखाया था amir Dad ने, इन बच्चों के मस्तिष्क में, आर्थिक सूझबूझ का बहुत मजबूत नीव डाल दिया था।


  • संपत्ति और देयता के बीच का अंतर


शुरुआत के लिए, पहला पाठ, जो आपको जानना चाहिए वह है कि आपको ऐसेट ओर लायबिलिटी (संपत्ति और देयता) के बीच का अंतर जानना चाहिए और आपको ऐसेट लेना चाहिए। अगर आप amir बनना चाहते हैं, तो आपको बस यही अच्छे से समझना होगा देखिए, अमीर लोग, संपत्ति को इकट्ठा करते हैं garib और मध्यमवर्ग, लायबिलिटी को जमा करते हैं और अधिकतर समय वह सोचते हैं कि यह एसेट है। प्राथमिक तौर पर आर्थिक संकटों का कारण, लायबिलिटी और ऐसेट के बीच अंतर ना कर पाने की वजह से होता है।


  • व्यक्ति की कमाई उसकी naukari


तो अभी आपको पता है कि ऐसेट ओर लायबिलिटी क्या (संपत्ति और देयता) है, है ना? एसेट कुछ ऐसा है जो आपको को मुनाफा कमाए के दें और लायबिलिटी, वह है जिसके वजह से आपका पैसा घट जाए। उदाहरण के लिए, एक सामान्य व्यक्ति का कैश फ्लो पेटर्न देखते हैं। इस व्यक्ति की कमाई उसके naukari से होती है और खर्चे में है जैसे, खाना, कपड़ा, मनोरंजन और यातायात और बदकिस्मती से इनके पास कोई ऐसेट नहीं है। मगर, लायबिलिटी तो बिल्कुल है, जिससे इनके paise घटते जा रहे हैं। क्योंकि बंधक, शुल्क, क्रेडिट कार्ड, लोन और मानो या ना मानो, यह घर भी।


  • naukari द्वारा paisa कमाना


एक नजर डालते हैं, एक amir व्यक्ति के कैश फ्लो पैटर्न पर सिर्फ़ अपने naukari द्वारा paisa कमाने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाए वह संपत्ति खरीदते हैं, जिससे उनके खाते में पैसिव इनकम के रूप में paisa जुड़ता है पैसिव इनकम, पैसा कमा कर देता है, जहाँ आपको अपना समय लगाने की आवश्यकता नहीं होती तो दूसरे शब्दों में, आप सोते हुए भी, paisa कमा सकते हैं ऐसेट के उदाहरण हैं ऐसे बिजनेस, जहाँ आप की उपस्थिति अनिवार्य न हो, स्टॉक, बॉन्ड, म्यूच्यूअल फंड रियल एस्टेट जिससे आय हो। रॉयल्टी, नोट और कुछ भी जिससे कोई आय (income) हो रही हो।

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया था कि garib डैड अपने naukari के जरिए काफी पैसा अर्जित कर रहे थे मगर उनके खर्चे, उनके इनकम के साथ-साथ बड़े रहा था। जो उनको एसेट में निवेश करने से रोक रहा था। इसके वजह से, उनके लायबिलिटी जैसे बंधक, क्रेडिट कार्ड कर्जा बढ़ता ही चला गया और यही दोष है, जब, आय = खर्चा, होता है और sampati लायबिलिटी से कम होता है और यही कारण था, जिसकी वजह से पुअर डैड कर्जे तले दबते चले गए उनके मृत्यु के उपरांत भी। मगर दूसरी तरफ, Rich dad के निजी वित्तीय स्टेटमेंट दर्शाता था एक संपूर्ण life जो समर्पित था निवेश और लायबिलिटी को कम करने के प्रयास में।


  • amir नहीं बनने का कारण


इसलिए, उनका इनकम खर्चों से ज़्यादा था, क्योंकि उनके ऐसेट लायबिलिटी से ज़्यादा थे और यही कारण था कि यह amir अधिक amir होते जाते हैं। उनके एसेट इतना इनकम पैदा करते हैं, की जो उनके खर्चों से काफी ज़्यादा होता है और बाकी बचा बैलेंस फिर से ऐसेट में पुनर्निवेश किया जाता है। ऐसेट बढ़ते रहता है और इस वजह से साथ-साथ इनकम भी बढ़ता है गौर कीजिए कि दोनों डैड कड़ी मेहनत करते थे, मगर उनके सोच एक-दूसरे के विपरीत थे एक डैड कहते थे, अच्छे से पढ़ो जिससे कि तुम्हें naukari के लिए एक अच्छी company मिले और दूसरे डैड कहते थे, मेहनत से पढ़ो, जिससे कि तुम एक अच्छी कंपनी खरीद सको एक पिता कहते थे, मेरे amir नहीं बनने का कारण मेरे बच्चे हैं।


  • मुझे अमीर बनना हैं


दूसरे पिता कहते थे, मुझे अमीर बनना ही होगा क्योंकि मेरे पास बच्चे हैं। एक डैड कहते थे, जब paisa की बात हो तो, सुरक्षित निर्णय लेना और कोई जोखिम नहीं लेना चाहिए। दूसरे डैड कहते थे, अपने जोखिम को प्रबंधन करना सीखो। एक ने कहा, मैं यह खरीद नहीं सकता। दूसरे ने कहा, मैं किस तरीके से इसे kharid सकूंगा? हालांकि, दोनों ही शिक्षा पर जोर देते थे। मगर क्या सीखना चाहिए इस पर उनका मतभेद था। रॉबर्ट ने अपने रिच डैड से सीखा कि साधारण लोगों के बारे में यह सच है कि उनका सारा life दो भावनाओं से चलता है डर और लालच जो उन्हें 'उठो, काम में जाओ और Bill भरो' के पैटर्न में फंसा देता है 'उठो, work में जाओ और बिल भरो' डर उनको इस जाल में फांस लेता है paisa कमाना और काम करना।


  • अधिक paisa की कामना


पैसा कमाना और यह गुंजाइश करना कि 'paisa ना होने का डर' चला जाएगा इस डर का मुकाबला करने के बजाय वह अपने भावनाओं के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। दूसरी भावना जो है 'इच्छा' कुछ इसे लालच भी कहते हैं, यह दूसरा कारण है कि लोग क्यों पैसे के लिए काम करते हैं। वह paisa की इच्छा करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें वह सुख हासिल होता है जो वह खरीद सकते हैं मगर जो सुख paise द्वारा खरीदा जाता है ज्यादातर वक्त अल्पायु होता है और जल्द ही, अधिक खुशी, अधिक आराम और अधिक सुरक्षा के लिए अधिक paisa की कामना करते हैं।


  • Education और jobs दोनों ही महत्त्वपूर्ण


आप, गौर कीजिए कि यह वही डर और इच्छा है, जिस वजह से कई सारे लोग कॉलेज जाते हैं जिससे उन्हें एक मोटी तनख्वाह की naukari मिल सके। मगर हताश ना हो Education और jobs दोनों ही महत्त्वपूर्ण है मगर यह उस डर को ठीक से संभाल नहीं पाएंगे। इस डर को संभालने के लिए आपको पैसे की ताकत को सीखने की ज़रूरत है। ना कि उससे डरने की। बदकिस्मती से ज्यादातर विद्यालय इसके बारे में नहीं सिखाते है और अगर आप इसे नहीं सीखते हैं तो आप paisa के गुलाम बन जाएंगे।


  • भावनात्मक सोच के उदाहरण


पैसे के प्रति अवज्ञा, बहुत ज़्यादा लालच और डर पैदा कर सकता है। जो आपको ज़िन्दगी के सबसे बड़े जाल में फंसा सकता है, वह है हमेशा काम करते रहना। amir डैड कहते हैं, "अपने भावनाओं का इस्तेमाल सोचने के लिए करो, ना कि अपने भावनाओं से सोचो" भावनात्मक सोच के उदाहरण है: मुझे एक दूसरी naukari चाहिए, मुझे पगार में वृद्धि चाहिए, मुझे यह नौकरी चाहिए क्योंकि यह सुरक्षित है, बजाय यह सोचने के की,


  • अमीरों के लिए उनका इनकम


क्या यहाँ पर कुछ ऐसा है जो मैं नहीं देख पा रहा हूँ? यह हमारी हकीकत है, ज्यादातर लोगों के लिए आपका व्यवसाय आपका इनकम है। amiro के लिए उनका एसेट, उनका इनकम है। अपने life में इन सीख का प्रयोग करें ।

मैं आपको आपकी संपत्ति का परिभाषा पूछूं कि अगर आप आज काम करना बंद कर दें आप कितने दिन चला लेंगे? आपको शायद मुझ पर हंसी आए और आप कहें, "मैं paisa के लिए काम नहीं करता" "paisa मेरे लिए काम करता है" post गरीब और अमीर में अंतर अमीर कैसे बने?  पढ़ने लिए धन्यवाद दोस्तों। 

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